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हरेन पांड्या मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट

 गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री हरेन पंड्या हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए निचली अदालत के निर्णय को बहाल कर दिया है. ज्ञात हो कि निचली अदालत ने इस केस में 12 को दोषी ठहराया था, जबकि हाईकोर्ट ने सभी को बरी कर दिया था. 2003 के इस हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनायी गई थी.

गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के हरेन पांड्या हत्याकांड के सभी 12 आरोपियों के खिलाफ लगे हत्या के आरोपों को हटा दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई की ओर से की गई जांच अस्पष्ट है, कुछ तथ्यों की अनदेखी की गई है. इसमें बहुत कुछ छूट गया है. सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. याचिकाकर्ता सीपीआईएल पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है.

ज्ञात हो कि इस हत्याकांड में सेशन कोर्ट ने आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था. सीबीआइ ने 2012 में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में एनजीओ सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशंस (सीपीआईएल) की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि इस मामले में निचली अदालत में फैसले के बाद चार नए तथ्य सामने आए हैं और ऐसी स्थिति में नए सिरे से जांच के आदेश की आवश्यकता है.

गुजरात में नरेंद्र मोदी की सरकार के समय में तत्कालीन गृह मंत्री हरेन पांड्या की 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद के लॉ गार्डन इलाके में उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह सुबह की सैर कर रहे थे. विशेष पोटा अदालत ने 2007 में सभी 12 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि 29 अगस्त 2011 को गुजरात हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था.

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